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सारे संसार के धर्मां में औरत का स्थान

" रोम में एक बहुत बडा समावेश रखा गया, इसमें औरतों के समस्याओं पर तर्क की गई। फिर यह निर्णय लिया गया कि औरत एक प्राणी है। जिसमें प्राण नही है, और इसी कारण वह परलोक जीवन की वारिस नही होती है। वह एक गंदगी है। इसी कारण वह माँस खाये, न हसे, बल्कि बात तक ना करें। औरत पर यह अवश्य है कि वह अपना समय पूजा-पाठ और सेवा में व्यतीत कर दे। इन लोगोने औरत को इन सारे विषयें से मना करने के कारण उसके मुँह पर एक लोहे का ताला डालदिया था। जिसके कारण औरत चाहे उच्छ परिवार से हो या तुच्छ परिवार से। छोटी-छोटी गलियों में चला करती थी। अपने ही घर में दिन-रात व्यतीत करती थी और उसके मुँह पर ताला हुआ करता था। इससे हटकर औरतों पर शारीरिक दण्ड लागू किये जाते थे। इस खयाल से कि औरत गुमराही का एक कारण है जिसका शैतान लोगों के दिलों को भटकाने के लिए उपयोग करता है। "

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