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ईमान (विशवास) और चिंता दोनों एक जगह इखटठा नही हो सकते

" निशचिंता रूप से समुद्र कि बड़ी बड़ी लहरें समुद्र के भीतर के शाँति को कभी अशाँत नही करती और ना उस्के सुखों को समाप्त करती है। इसी प्रकार से जब मानव ईशवर पर गहरा विशवास करलेता है तो वह चिंता से मुक्ती प्राप्त करलेता है। संतुलित जीवन बिताता है, और भविष्य में आने वाली दुविधाओं का सामना करने के लिए सदा तैयार रहता है। "

विलियम जेम्स

अमेरिका दर्शनिक

विलियम जेम्स

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