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चिंता का युग

" हम चिंता के युग में जीवन यापन कर रहे हैं। और इस बात में कोई शंका नही कि सैन्सी और टेकनाँलजी के उपलब्दीयाँ मनुष्य के लिए कल्याण और आराम में अधिकता का कारण है। लेकिन बदले में मनुष्य के लिए प्रसन्नता, खुशी और संतोष में वृध्दि का कारण नही है। बल्कि इसके अन्यथा मनुष्य के लिए चिंता, निराशा और मानसिक रोगों में वृध्दि हो रही है। जिसके कारण मनुष्य इस जीवन की सुंदर अर्थ खो बैठा। "

रेनिह डोलो

नोबल पुरस्कृत लेखक

रेनिह डोलो

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