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सदा रहनेवाला संदेश

सदा रहनेवाला संदेश

सदा रहनेवाला संदेश

देवत्व धर्मो में उलट-फेर

जैसे जैसे लोग देवत्व मार्गदर्शन और रसूलों के संदेश से दूर होते गये, लोगों में अप्रसन्नता और अंधेरा छा गया। ईशवर एक रसूल के बाद दूसरा रसूल भेजता रहा। रसूल शुभ समाचार देनेवाले और सचेत करनेवाले बनाकर भेजे गये हैं, ताकि रसूलों के बाद लोगों के पास अल्लाह के मुक़ाबले में (अपने निर्दोष होने का) कोई तर्क न रह। अल्लाह अत्यन्त प्रभुत्वशाली, तत्वदर्शी है। (अल-निसा, 165)

ईशवर किसी को रसूल भेजने से पहले यातना नहीं देता । और हम लोगों को यातना। नहीं देते जब तक कोई रसूल न भेज दें । (अल-इस्रा, 15)

ईसा (अलैहिसलाम) के आने, फिर ईशवर की ओर से उन्हें उठा लिये जाने के बाद मानवता अज्ञान, गुमराही और अन्याय से पीडित थी। पवित्र एकीकरण के सिद्धांत को मूर्ति पूजा से बदलने वाले ग़लत लोगों की ओर से देवत्व धर्म बदलाव और विरूपण का शिकार हो गये, जो ईशवर की शान में गुस्ताख़ी करते थे, ना हक़ उस पर आरोप लगाते थे। परन्तु किताब वालों और मूर्ति पूजा करनेवालों के जीवन और प्रार्थनाओं के बीच कोई अंतर नही था। नास्तिकता, बहु आराधिकता और ईशवर की वाणी में परिवर्तन के ढ़ेर के बीच एकीकरण का आकाश बुझ गया। किताब वालों ने वचनों और ईशवर की वाणी को पीठ पीछे डाल दिया। उसकी परवाह नहीं की। सत्य को छुपाया। असत्य को प्रभुत्व प्रधान किया। ईशवर और प्रजा के अधिकारों को कुछ न समझतें हुए ईशवर की हराम की हुई चीज़ों का उपयोग किया। और इस तरह से वे सत्य को छिपाते हुए मामूली-मामूली धन और नायकत्व प्राप्त कर लिये, जिस प्रकार से कि हवस के पीछे चलने वाले और सत्य को छोडकर अपनी इच्छाओं को सही समझने वाले उनके मुखियाओं के साथ हुआ है। परन्तु रक्त रंजित युद्ध साधारण चीज़ हो गयी। अत्याचार आम हो गया। मानवता गहरे अंधेरे में जीवन बिताने लगी, और अज्ञान और बहुआराधिकता के कारण पाक दिल ना पाक हो गये। चरित्र बिगड़ गये। बलात्कार किया जाने लगा । अधिकारों का उल्लंघन होने लगा और जगह-जगह बुराई फैलने लगी। यहाँ तक कि अगर कोई विद्वान विचार करेगा, तो उसको यह मालूम हो जायेगा कि उस समय अगर ईशवर किसी ऐसे महान सुधारक को न सुधारता, जो ईश देवत्व के मशाल को और मार्गदर्शन के प्रकाश को मानवता के मार्ग को रोशन करने और सीधे पथ की ओर उसकी मार्गदर्शनी के लिए उठाये तो मानवता अपनी मौत के पास हो गयी थी और अपने निधन का निर्णय कर चुकी थी।

मानवता का रक्षक

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जॉर्ज सारथोन

वाशिंग्टन और हारवर्ड यूनिवर्सिटी का प्राध्यापक
एक महत्वपूर्ण घटना
मानवता के इतिहास में सबसे सर्वश्रेष्ठ परिणाम के अनुसार जो घटना घटी है, वह इस्लाम धर्म का उपस्थित होना है।

परन्तु मानवीय जीवन के इस अंधेरे काल में ईशवर ने अपने नबी को भेजा। और मुहम्मद को अपना मबी बनाया, ताकि वे अल्लाह के रसूल और नबियों के समापक (अन्तिम नबी) हैं। (अल-अहज़ाब, 40)

ईशवर ने अपने नबी के साथ गुमराही और अप्रसन्नता से मानवता को बचाने वाला प्रकाश देकर भेजा। यहाँ तक कि ईशवर ने मानवता के लिए इस धर्म को पूरा किया। अपनी पूरी अनुग्रह को पूर्ण किया और सारे संसार तक सत्यता को पहुँचाने के लिए प्रयास किया । हमने तुम्हें सारे संसार के लिए सर्वथा दयालुता बनाकर भेजा है। (अल अंबिया, 107)

ताकि उन्हें प्रसन्नता के मार्ग का स्वाद प्राप्त हो जाये।

ताकि उन्हें प्रसन्नता के मार्ग का स्वाद प्राप्त हो जाये। आप अपने सारे प्रयासों में संसार के थोडे माल की भी इच्छा नही रखते थे, और न आप लोगों से कोई बदला माँगते थे। ईशवर ने कहा। कह दो, मैं इसपर तुमसे कोई पारिश्रमिक नहीं माँगता, और न मैं अपनी ओर से बातें बनाने वालों में से हूँ। (साँद, 86)

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लोथ्रो पस्टू डार्ड

अमेरिकन लेखक
सबसे अधिक प्रभावित करनेवाली खबर
इस्लाम धर्म के उपस्थित होने की खबर मानवता की इतिहास में सबसे अधिक प्रभावित करने वाली खबर है, इस प्रकार से कि इस्लाम धर्म ऐसे लोक में उपस्थित हुआ, जिनका इस्लाम की उपस्थिती से पहले कोई नामो-निशान नही था। और ऐसे देश में इस्लाम की उपस्थिती हुई, जिसका कोई हिसाब ही नही था। परंतु इस्लाम की उपस्थिती पर केवल दस(10) ही वर्ष हुए थे कि इस्लाम बडी और फैली हुई शाशनों को तोडते हुए, कई वंशज और कई दशकों से चले आते हुए पुरातन धर्मों को मिटाते हुए, संसार के कई प्रांतों के लोगों की भावनाओं को बदलते हुए, और मज़बूत स्थंभों वाली एक नया संसार बनाते हुए इस्लाम की व्याप्ती हुई, और वह संसार इस्लामिक संसार है।

बल्कि ईशवर ने आपको इंजील रसूल होने या मानव रसूल होने का विकल्प दिया तो आप ने मानव रसूल होने का विकल्प चुत लिया । आप दूसरे मानव की तरह एक मानव होकर जीवन बिताने थे। आपको अपने साथियों की तरह भूख लगती थी। आप अपने साथियों की तरह घायल हुआ करते थे। आप उनके साथ काम करते थे, और आपको ईशवर का बन्दा होने पर गर्व था। परन्तु ईशवर ने आपको जब सम्मान देने का निर्णय लिया, तो आपके बन्दे होने का गुण वर्णन किया। ईशवर ने कहा। प्रशंसा अल्लाह के लिए है जिसने अपने बन्दे पर यह किताब उतारी और उसमें (अर्थात् उस बन्दे में) कोई टेढ़ नहीं रखी (अल-कहफ़ 1)

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लामार्थीन

फ्रेंच कवी
सारे संसार के लिए करूणामय
निश्चित रूप से मुहम्मद (स) के जीवन के समान कोई जीवन, आप की तरह सोंच-विचार की क्षमता, अपनी लोक में स्थित अज्ञानता और मिथक के विरुद्ध प्रभावशाली सफलता, मूर्ती पूजा करने वालों से मिलने वाली कष्टों पर दृढ़ रहना, अपने संदेश को बुलन्द करना, और इस्लामी सिद्धांत के स्थंभों को मज़बूत करने के लिए आपकी बहादूरी इस बात का सबूत है कि आप अपने मन में किसी धोखे का विचार गुप्त नही रखा करते थे, या आप गलत नही थे। आप दार्शनिक, वक्ता, प्रवक्ता, इस्लामी नियम बताने वाले, मानवता की बुद्धि की ओर निर्देश करने वाले, ऐसे धर्म की स्थापना करने वाले जिसमे किसी प्रकार का संदेह नही, पृथ्वी पर 20 राज्य बनाने वाले और आकाश पर आध्यात्मिक राज्य के विजेता। कोई मनुष्य है जिसको आपके समान मानवीय सम्मान मिला ? और कोई मनुष्य है जो सफलताओं के उस उच्छ स्थर को प्राप्त किया हो। जिसको आपने प्राप्त किया है ।

बल्कि आप हर किसी को अपने बारे में अतिशयोक्ति करने या अपने अधिकार से ज्यादा अधिकार देने से डराते थे। आप ने कहा ईसा इब्ने मरियम के बारे में ईसाइयों के समान आप लोग मेरे बारे में अतिशयोक्ति न करो। मैं तो केवल ईशवर का बन्दा हूँ। परन्तु आप लोग मुझे ईशवर का बन्दा और रसूल कहो (इमाम बुख़ारी ने इस हदीस का वर्णन किया। आपको देखने और जाननेवाला हर व्यक्ति आपकी सत्यता जान लेता है। आपके चरित्र से हक्का-बक्का हो जाता है, औऱ आपके आचार से खुश हो जाता है। कैसे नहीं होगा । जबकि दोस्तों से पहले दुशमनों ने और मुसलमानों से पहले काफ़िरों ने आपके हक़ में गवाही दी। आपके लिये तो आचार के प्रति आपके रब की गवाही काफ़ी है। निस्संदेह तुम एक महान नैतिकता के शिखर पर हो। (अल क़लम, 4)

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मैकल हार्ट

अमेरिकन लेखक
मानवता के महान लोग
निश्चित रूप से इतिहास में मुहम्मद (स) ही केवल वह व्यक्ति है जो धार्मिक और सामाजिक दोनों मंच में बेमिसाल सफलता प्राप्त की है। धार्मिक रूप से और सामाजिक रूप से संसार पर एक साथ प्रभावित करने की यह क्षमता इस विषय पर मजबूर करती है कि मानवीय इतिहास मै मुहम्मद (स) सबसे अधिक प्रभावशाली व्यक्ति है।

बल्कि आप के लिए रसूलों और नबियों का ईशवर की ओर से समापक बनाया जाना ही काफ़ी है। जब आपका मिशन पूरो हो गया तो ईशवर ने आपको मृत्यु दी और आपके संदेश को मानवता के लिए क़ियामत तक बाक़ी रख दिया।

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सच्ची एकीकरण (तौहीद)