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इस्लाम धर्म के स्त्रोत

इस्लाम धर्म के स्त्रोत

इस्लाम धर्म के स्त्रोत

इस्लाम धर्म अपने आदेश, सिद्धांत और नियमों देवत्व रहस्योद्घाटन (ख़ुरआन और हदीस) से निकला। यही इस्लाम के स्त्रोत है। इन्हीं से इस्लामिक नियम, सिद्धांत और आदेश निकलते हैं। हम आगे इन दोनों के बारे में छोटा सा प्रसंग लिखेंगे ।

पवित्र ख़ुरआन

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बषीर चात

भारतीय धार्मिक प्रचारक
ख़ुरआन देवत्व पुस्तकों का समापक है
जिस समय मैंने एकी करण के सिद्धांत पर विश्वास करलिया। तो मैंने उन परिणाम की खोज करना प्रारंभ कर दिया। जिनसे यह परिणाम निकलता है कि ख़ुरआन ईशवर की पुस्तक और देवत्व पुस्तकों का समापक है। मैं ईशवर का आभारी हूँ। उसने मुझे इस समस्या का साधन पाने कि क्षमता दी। ख़ुरआन वही अनोखी एक पुस्तक है जो दूसरी देवत्व पुस्तकों को मानती है। जबकि दूसरी सारी पुस्तकें एक दुसरे का तिरस्कार करती है। वास्तव में यही ख़ुरआन की विशेषता में से एक विशेषता है।

ईशवर ने अपने रसूल मुहम्मद पर क़ुरआन अवतरित किया, जो डर रखनेवालों के लिए मार्गदर्शन, मुसलमानों के लिए संविधान, उन लोगों के लिए सुखी है जिनके प्रति ईशवर ने मार्गदर्शन का निर्णय लिया है, और उन लोगों के लिए प्रकाशन है, जिनके प्रति ईशवर ने सफलता लिख दी है। क़ुरआन उन नियमों पर आधारित है, जिनके लिए ईशवर ने रसूलों को भेजा। क़ुरआन देवत्व पुस्तकों में कोई नई चीज़ नही है। इसी प्रकार मुहम्मद भी रसूलों में कोई नई बात नहीं है। निस्संदेह ईशवर ने इब्राहीम पर कई पुस्तकें अवतरित किया । मूसा को तौरात से, दाऊद (डेविड) को ज़बूर से, और ईसा मसीह को बाईबल से सम्मान दिया। ये सारी पुस्तकें ईशवर की ओर से अपने रसूलों पर वहयी (रहस्योद्घाटन) की गयी है। क़ुरआन के ईशवर द्वारा वह्यी होने, सारे रसूलों पर विश्वास रखने और इनमें से किसी के बीच अंतर न करने वाला होने का प्रमाण ईशवर का यह उद्घाटन है। जो लोग अल्लाह और उसके रसूलों का इन्कार करते हैं और चाहते हैं कि अल्लाह औस उसके रसूलों के बीच विच्छेद करें, और कहते हैं कि हम कुछ को मानते हैं और कुछ को नही मानते, और इस तरह वे चाहते हैं कि बीच की कोई राह अपनाएँ, वही लोग पक्के इन्कार करनेवाले हैं, और हमने इन्कार करनेवालों के लिये अपमान जनक यातना तैयार कर रखी है। रहे वे लोग जो अल्लाह और रसूलों पर ईमान रखते हैं और उनके (रसूलों के) बीच अन्तर नही करते। ऐसे लोगों को अल्लाह शीघ्र ही उनके प्रतिदान प्रदान करेगा। अल्लाह बडा क्षमाशील, दयावान है। (अल-निसा, 150, 152)

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वेलडोरान्ट

अमेरिकन लेखक
ख़ुरआन कि छवी और उसकी महान्ता
14 सदियों तक ख़ुरआन मुसलमानों के विचार, आचार और लाखों लोगों कि प्रतिभा सुधारते रहा। ख़ुरआन मन में अधिकतर सरल, अल्प अस्पष्टता, परंपरा और रिवाज का अनुसरण करने से बहुत दूर, मूर्ती पूजा और पुजारियों से मुक्ति पाने का सिद्धांत पैदा करता है। मुसलमानों के चारित्रिक और संस्कृतिक स्थल को ऊँचा करने में इस्लाम ही की बड़ी भूमिका है। इस्लाम ने ही मुसलमानों के बीच समाजिक विधी और समाजिक संघटन की स्थापना की है। उन्हें सही नियमों का पालन करने पर प्रोत्साहिक बनाया। उनकी बुद्धी को मिथक, भ्रम, अन्याय और क्रुर्ता से आज़ाद किया। सेवकों कि स्थितियों को सुधारा और निमन जाती लोगों के मन में सम्मान पैदा किया।

लेकिन इन पिछली पवित्र पुस्तकों में से अधिकतर पुस्तकें खो गयी है। इन में से बहुत सी किताबें मिट गयी हैं इन पुस्तकों में परिवर्तन और विरूपण भी हुआ है।\

जहाँ तक पवित्र क़ुरआन की बात है, तो ईशवर ने इसकी सुरक्षा की ज़िम्मेदारी ली है। ईशवर ने कहा । यह नसीहत निश्चय ही हमने अवतरित की है और हम स्वयं इसके रक्षक हैं। (अल-हिज्र, 9)

ईशवर ने क़ुरआन को प्रमुख और पिछली पुस्तकों का समापक बनाया है। ईशवर ने कहा । और हमने तुम्हारी ओर यह किताब हक़ के साथ उतारी है, जो उस किताब की पुष्टि करती है जो इसके पहले से मौजूद है और उसकी संरक्षक हैं। (अल-माइदा, 48)

क़ुरआन को अवतरित करनेवाले ईशवर ने इसके बारे में विवरण करते हुए यह कहा कि क़ुरआन हर चीज़ को खोलकर बयान करता है। ईशवर ने कहा । हमने तुमपर किताब अवतरित की हर चीज़ को खोलकर बयान करने के लिए और मुस्लिमों (आज्ञाकारियों) के लिए मार्गदर्शन, दयालुता और शुभ-सूचना के रूप में। (अल-नहल, 89)

क़ुरआन मार्गदर्शन और दयालुता है। ईशवर ने कहा । तो अब तुम्हारे पास तुम्हारे रब की ओर से एक स्पष्ट प्रमाण, मार्गदर्शन और दयालुता आ चुकी है। (अल-अनआम, 157)

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सिडनीवेषर

ओहायो(अमेरिका) विश्वविद्यालय का अध्यापक
संपूर्ण पुस्तक
ख़ुरआन शिक्षा देने और शिक्षित बनाने वाली पुस्तक है। ख़ुरआन में केवल आदेश और धार्मिक संस्कार ही नही है। ख़ुरआन जिन अच्छे कार्य की और मुस्लिम को बुलाता है, वह नैतिकता के भाग में सर्वश्रेष्ठ और महत्वपूर्ण है। इस पुस्तक का मार्गदर्शन उसके आदेशों के प्रकार निशेदों में भी प्रकट है।

क़ुरआन सब से सीधा मार्ग दिखाता है। ईशवर ने कहा । वास्तव में यह क़ुरआन वह मार्ग दिखाता है जो सबसे सीधा है और उन मोमिनों को, जो अच्छे कर्म करते हैं, शुभ-सूचना देता है कि उनके लिए बडा बदला है। (बनी इसराईल, 9)

क़ुरआन मानवता को उनके जीवन के हर भाग में सीधे रास्ते की ओर मार्ग दिखाता है।

पवित्र क़ुरआन मनुष्य की सारी आवश्यकताओं को पूरा करता है। क़ुरआन नियम, सिद्धांत, आदेश, व्यवहार, आचार और इसके अतिरिक्त बहुत सी बातें अपने अन्दर रखता है। ईशवर ने कहा । हम ने किताब में कोई भी चीज़ नही छोडी है। (अल-अनआम, 38)

रसूल की वाणी

ईशवर ने अपने रसूल पर पवित्र क़ुरआन अवतरित किया, और वहयी (रहस्योद्घाटन) द्वारा हदीस उतारा। ईशवर ने कहा वह तो बस एक प्रकाशन है जो की जा रही है। (अल-नज्म, 4)

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इतेनडिन्हे

फ्रेंच आलोचक और चित्रकार
रौशन वाणी (हदीस)
मुहम्मद कि रौशन वाणी (हदीस) आज तक बाक़ी है। जो धर्ती पर मौजूद आपके लाखों अनुयायी के मन में स्थिर धार्मिक प्रेर्णता का खुला परिमाण है।

हदीस तो क़ुरआन के समान है। रसूल ने कहाः ध्यान से सुनो, मुझे पुस्तक और इसके समान एक और चीज़ दी गयी है। ध्यान से सुनो, मुझे क़ुरआन और इसके समान एक और चीज़ दी गयी है। (इस हदीस को इमाम अहमद ने वर्णन किया है) हदीस ईशवर द्वारा अपने रसूल मुहम्मद की ओर प्रकाशना है। क्योंकि मुहम्मद अपने इच्छाओं के अनुसार नही बोलते। बल्कि वह वही बात लोगों तक पहुँचाते हैं जिनका उन्हें आदेश मिलता है। ईशवर ने कहा । मैं तो बस उसी का अनुगामी हूँ जिसकी प्रकाशना मेरी ओर की जाती है और मैं तो केवल एक स्पष्ट सावधान करनेवाला हूँ। (अल-अहक़ाफ़, 9)

हदीस इस्लाम का दूसरा स्त्रोत है । हदीस कहते हैं रसूल की हर बात या, कार्य को, या हर उस काम को जो रसूल के सामने किया गया हो, या वह बातें जिनमें रसूल के व्यक्तित्व के गुणों का विवरण किया गया हो, वह सही क्रमानुसार रूप से रसूल से जाकर मिलती हो। हदीस क़ुरआन का विवरण करनेवाली और उसको खोलकर बयान करनेवाली है। निश्चय ईशवर ने अपने रसूल को यह आदेश दिया कि वह क़ुरआन में लिखी हुई साधारण, विशेष या अल्प प्रसंग का विवरण करें। ईशवर ने कहा । और अब यह नसीहत तुम्हारी ओर हमने अवतरित की, ताकि तुम लोगों के समक्ष खोल-खोलकर बयान कर दो जो कुछ उनकी ओर उतारा गया है, और ताकि वे सोंच-विचार करें। (अल-नहल, 44)

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जैक रेस्लर

प्रच्यविधी विचारक
खुरआन और हदीस एक पल्ले में
ख़ुरआन का पूर्ण रूप में प्रचार करने वाली वाणी हदीस कहलाती है। वह मुहम्मद के कार्य और सलाह से संबन्धित उपन्यास की एक कडी है। हदीस द्वारा मानव मुहम्मद के मन में पैदा होने वाली बातें जानता है। जो जीवन कि बदलते स्थितियों के सामने मुहम्मद के आचार का महत्वपूर्ण भाग है। हदीस ख़ुरआन का विवरण करती है। हदीस के बिना कोई और चारा नही है।

हदीस क़ुरआन का विवरण करती है। उसके वाक्य को खोल कर बयान करती है। क़ुरआन के अल्प प्रसंग के आदेशों का विस्तृतीकरण करती है। परन्तु रसूल अपनी ओर अपतरित किये हुए आदेशों का कभी उपन्यास से, कभी कर्म से और कभी इन दोनों से वर्णन करते थे। निस्संदेह कुछ आदेशों और नियमों का विवरण करने मे हदीस स्वयं एक नियमवान ग्रंथ है।

हदीस इस्लाम के आदेश, सिद्धांत, प्रार्थना, व्यवहार और आचार का वास्तविक अनुरूप है। रसूल अपनी ओर अवतरित किये हुए आदेशों का पालन करते थे। लोगों के समक्ष उसका विवरण करते थे। अपने कर्मों के प्रकार लोगों को कार्य करने का आदेश देते थे। निस्संदेह ईशवर ने रसूल की बातों और कार्य में ईमानवालों को उनका अनुसरण करने का आदेश दिया है, ताकि उनका ईमान संपूर्ण हो जाय। ईशवर ने कहा । निस्संदेह तुम्हारे लिए अल्लाह के रसूल में एक उत्तम आदर्शन है, अर्थात उस व्यक्ति के लिए जो अल्लाह और अन्तिम दिन की आशा रखता हो और अल्लाह को अधिक याद करे। (अल-अहज़ाब, 21)

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ल्योबोल्ड फ़ायीस

ऑस्ट्रिया का आलोचक
मार्ग दिखानी वाली हदीस
मुहम्मद की हदीस का अनुसरण करना वास्तव में इस्लाम धर्म के वजूद और उसकी प्रगती कि सुरक्षा है। हदीस का पालन न करना इस्लाम धर्म की प्रगती में कमी का कारण है। निश्चय हदीस फ़ौलादी स्थंभ है, जिस पर इस्लाम का महल बना है। जब आप किसी महल के स्थंभ ही को तोड दें, तो क्या आप पत्तों के घर के समान इस महल के टूट जाने से आशचर्य होंगे ।

मानवीय सहाबा ने रसूल से उपन्यास और कर्मों को भविष्य में आनेवालों तक पहुँचाया । फिर वे अपने बाद में आनोवालों तक पहुँचाये। इसके बाद हदीस की पुस्तकों में इसको लिखा गया। हदीस को पहुँचाने वाले लोग इस विषय में बडी गंभीरता से काम लेते थे कि किस व्यक्ति से वे हदीस ले रहे हैं। इसी प्रकार वे जिनसे हदीस लेते, उनसे वे यह आवेदन करते कि वे जिनसे हदीस लिये हैं वह उनके काल में जीवित हों । ताकि हदीस का काल चक्र इसका विवरण करनेवाले से लेकर अल्लाह के रसूल तक जा मिले और इस काल चक्र के सारे व्यक्ति न्यायिक, सत्य, विश्वासी और अमानतदार हो।

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जैक रेस्लर

फ्रेंच प्रच्यविधी विचारक
नबी की हदीसों को एक जगह इकट्ठा करना
यह सारी वाणी कि बडी संख्या को हदीस कहते हैं। सहाबा से उसके चयन करने में बड़ी गंभीरता अपनाई गई। इसी प्रकार बहुत सी हदीसें एकट्ठा की गई।

क़ुरआन और हदीस को इस्लाम धर्म के दो महत्वपूर्ण स्त्रोत होने का विश्वास रखना ज़रूरी है। जिनका अनुसरण करना आदेशों का पालन करना, उनके निषेध से दूर रहना, उनकी सूचनाओं को सत्य मानना, उनमें विवरण किये हुए ईशवर के नाम, गुण और कर्मों पर विश्वास रखना, ईशवर ने अपने ईमानवाले भक्तों के लिये जिन चीज़ों का वादा किया है और काफिरों को जिन चीज़ों से डराया है उन सब पर विश्वास रखना आवश्यक है। ईशवर ने कहा । ये ईमानवाले नहीं हो सकते जब तक कि अपने आपस के झगड़ों में ये तुमसे फैसला न कराएँ । फिर जो फ़ैसला तुम कर दो उसपर ये अपने दिल में कोई तंगी न पाएँ और पूरी तरह मानलें । (अल निसा, 65)

ईशवर ने कहा रसूल जो कुछ तुम्हें दे उसे लेलो और जिस चीज़ से तुम्हें रोक दें उससे रुक जाओ । (अल-हश्र, 7)

क्या ही प्रसन्न है वह व्यक्ति जो इस मार्ग का पथिक है। वह प्रसन्नता का मार्ग है ।

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